क्या हमारा समाज केवल पुरुष प्रधान बनकर रह गया हैं ? यह न्यूज़ मुझे नवभारत टाइम्स में खोज बिन करने के बाद मिली ओ भी धुंडने बाद इस पुरुष प्रधान लोगोने महिलाओंको इतना निचे गिरा दिया हैं की जब की पुरुष टीम हरने के बाद भी मीडिया की पहली खबर होती हैं ऐसा क्यों ? क्या यह पुरुष प्रधान संस्क्रती तो नहीं, जी हाँ यह पुरुष प्रधान दुनिया हैं। येहाँ महिला जगत की कोई कीमत नहीं। महिलाओं का उपयोग तो केवल शारीर प्रदर्शन के लिए ही होता था , होता हैं और होता रहेगा। महिला क्रिकेट की जीत ही पुरुष प्रधान मीडिया, पुरुष प्रधान लोगोंको एक तमाचा हैं।
भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में
11 May 2010, 1725 hrs IST ,
सेंट किट्स ।। वर्ल्ड कप खेलने गए धोनी के धुरंधर भले ही जीत को तरस रहे हैं और सेमीफाइनल में पहुंचने के
लिए किसी और की जीत पर आस लगाए बैठे हों, लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में धमाकेदार एंट्री की है। टीम ने श्रीलंका को ग्रुप बी के अहम मुकाबले में 71 रन से हराकर महिला ट्वेंटी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है।
दोनों टीमों के लिए सेमीफाइनल में प्रवेश का यह आखिरी मौका था। भारत ने जबर्दस्त ऑलराउंड खेल दिखाते हुए बाजी अपने नाम कर ली। ऑफ स्पिनर डायना डेविड ने 12 रन देकर चार विकेट लिए जिसकी बदौलत भारत ने श्रीलंका को 9 विकेट पर 73 रन ही बनाने दिये।
इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया। ओपनर पूनम राउत सिर्फ 12 रन पर आउट हो गईं, लेकिन उसके बाद सुलक्षणा और मिताली ने दूसरे विकेट के लिए 63 बॉल्स पर 86 रन जोड़े। सुलक्षणा नाईक (59 रन) और मिताली राज (39 बॉल्स में 52 नॉट आउट)ने भारत को तीन विकेट पर 144 रन का स्कोर दिया था।
डायना ने श्रीलंकाई टॉप ऑर्डर की चूलें हिलाकर उसे 100 रन भी नहीं बनाने दिए। सिर्फ दीपिका रसंगिका (नॉट आउट 31) और एशानी कौशल्या (10) ही अपने निजी स्कोर को दहाई तक पहुंचा पाईं।
Wednesday, May 12, 2010
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